धर्मशाला। जिले में पशुपालन के प्रति ग्रामीणों का रुझान तेजी से कम हो रहा है। हाल ही में जारी 21वीं पशुधन गणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्षों के भीतर जिला का कुल पशुधन 7.92 लाख से घटकर 6.15 लाख पर सिमट गया है। पांच साल में 1.77 लाख पशु कम दर्ज किए गए हैं।
दूध उत्पादन की मुख्य रीढ़ मानी जाने वाली गायों और भैंसों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2019 की तुलना में जिले में गोवंश की संख्या तीन लाख से घटकर 1.84 लाख रह गई है। इनमें गायों की संख्या में करीब एक लाख से अधिक की कमी आई है।
इसी तरह भैंसों का आंकड़ा भी 1.34 लाख से घटकर मात्र 85 हजार रह गया है। भेड़ों और बकरियों की संख्या में भी 10 हजार की गिरावट आई है। पालतू कुत्तों की संख्या भी 45 हजार से कम होकर 30 हजार रह गई है।
व्यावसायिक पालन बढ़ा
घोड़े और सुअर पालने का चलन बढ़ा है। जिले में घोड़ों की संख्या 877 से बढ़कर 2000 तक पहुंच गई है। सुअर पालन में भी तेजी आई है। इनका आंकड़ा 582 से बढ़कर 1000 दर्ज किया गया है।
चारे की कमी, कृषि रकबे में गिरावट, युवाओं का अन्य पेशों की ओर रुख और खेती-बाड़ी में घटती रुचि के चलते लोग अब घरों में गाय-भैंस पालने से कतरा रहे हैं। इसी कारण पारंपरिक दुधारू मवेशियों के आंकड़ों में तेजी से कमी आई है। -डॉ. सीमा गुलेरिया, उपनिदेशक पशु प्रजनन, कांगड़ा