बीड़ बिलिंग की चार पंचायतों के सैकड़ों लोगों को दिक्कत
किसी भी निमार्ण कार्य के लिए जरूरी होती है अनुमति लेना
संवाद न्यूज एजेंसी
बैजनाथ (कांगड़ा)। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्वप्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी की चार पंचायतों बीड़, चौगान, क्योर और गुनेहड़ की एक हजार से अधिक आबादी को साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) और टीसीपी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन चार पंचायत के लोगों को किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने के लिए साडा के तहत अनुमति की आवश्यकता रहती है। साडा की अनुमति के लिए सरकार की ओर से वास्तुकारों का एक पैनल पंजीकृत किया गया है। विभाग से पंजीकृत आर्किटेक्ट ही इस अनुमति के लिए दस्तावेज बनाने के लिए अधिकृत किए गए हैं।
लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण अधिकांश लोगों को अनुमति की प्रक्रिया का ज्ञान ही नहीं है और ऊपर से यह आर्किटेक्ट मनमानी फीस वसूलने के बावजूद अनुमति के लिए लंबा समय लगा रहे हैं। इन पंचायतों में कई लोग पिछले छह माह से अनुमति के इंतजार में हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ प्रदेश सरकार पर्यटन को ग्रामीण स्तर पर बढ़ावा देने के लिए योजनाएं ला रही है और दूसरी तरफ साडा और टीसीपी के कारण ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। बीड़ की इन पंचायतों में 2018 से साडा काम कर रहा है, लेकिन प्रदेश सरकारों ने न तो नियमों का सरलीकरण किया गया और न ही पर्याप्त स्टाफ की तैनाती की गई। गांववासियों गोपाल, रवि कुमार, सतीश, प्रदीप कुमार, करण सिंह, जगदीश, रोशन, अजय और राहुल आदि का कहना है कि समस्या का हल न होने पर मजबूरन उन्हें साडा के अध्यक्ष के कार्यालय का घेराव करना पड़ेगा। शारदा के अध्यक्ष एवं एसडीएम देवी चंद ठाकुर ने बताया कि सरकार इन नियमों में सरलीकरण करने जा रही है और इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा।