इंदौरा, फतेहपुर में धान और मक्की की फसल तबाह
621 हेक्टेयर भूमि पर लहलहा रही थी मक्की और धान
पौंग के पानी से किसानों को झेलना पड़ा 128 लाख का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। भारी बारिश से एक तरफ जहां घरों और गोशालाओं को नुकसान पहुंचा है वहीं, मैदानी इलाकों इंदौरा और फतेहपुर में बाढ़ के पानी से किसानों की धान और मक्की की फसल बर्बाद हो गई है। पौंग बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण इंदौरा और फतेहपुर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इससे वहां करीब 621 हेक्टेयर भूमि पर धान और मक्की की फसल तबाह हो गई है। इससे करीब 128.80 लाख रुपये का नुकसान किसानों को झेलना पड़ा है। पहले धान की फसल को वायरस और अब बाढ़ ने काफी नुकसान पहुंचाया है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 218.24 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसमें 188.24 हेक्टेयर भूमि पर फसल को 33 फीसदी के कम और 30 हेक्टेयर भूमि पर फसल को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पहुंचा है। इससे कुल 24.56 लाख रुपये का मक्की की फसल को नुकसान का आकलन किया गया है। वहीं 382.80 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल को क्षति पहुंची है। इसमें 143 हेक्टेयर भूमि पर फसल को 33 फीसदी से कम और 239 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल को 33 फीसदी के अधिक नुकसान पहुंचा है। इससे करीब 95.70 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है।
इसके अलावा 20 हेक्टेयर भूमि पर खरीफ दालों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे करीब आठ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। सब्जियों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। इसमें 92.40 हेक्टेयर भूमि पर बीजी सब्जियां प्रभावित हुई हैं। इससे 22 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा है। अभी क्षेत्र में पानी ज्यादा होने के कारण नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है। पानी कम होने के बाद भी वास्तविक स्थिति और असल नुकसान का पता चल पाएगा।
पहाडी़ क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश से पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंच गया था। इससे बाद बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इस वजह से आप-पास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। लोगों को घरों से रेस्क्यू किया जा रहा है। विभाग के अनुसार करीब 91 हेक्टेयर भूमि पर फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है। इससे 43.24 लाख रुपये के करीब नुकसान पहुंचा है।
- पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसमें धान, मक्की और सब्जियां शामिल हैं। नुकसान की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज दी गई है। - कुलदीप धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग कांगड़ा