कांगड़ा। केंद्र सरकार द्वारा पुराना कांगड़ा स्थित ग्रामीण डाकघर को बंद करने की अधिसूचना जारी करने के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। सोमवार को पुराना कांगड़ा में विरोध जताने के बाद मंगलवार को गुस्साए लोगों ने नगर पार्षद अनिल चौधरी की अगुवाई में मुख्य डाकघर कांगड़ा पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने 1960 से संचालित इस डाकघर को यथावत बहाल रखने अथवा इसे ‘नॉन डिलीवरी पोस्ट ऑफिस’ के रूप में अपग्रेड करने की मांग उठाई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्यालय के लिए निशुल्क भवन उपलब्ध करवाए जाने और छह हजार से अधिक खाते होने के बावजूद 26 सितंबर से डाकघर पर ताला लगा दिया गया।
खातों को समेला डाकघर स्थानांतरित किए जाने से बुजुर्गों के लिए पेंशन लेना कठिन हो गया है। सीनियर सिटीजन फोरम के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर पुराना कांगड़ा डाकघर को नॉन डिलीवरी कार्यालय अधिसूचित नहीं किया गया, तो मटौर-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम किया जाएगा।
कांगड़ा मुख्य डाकघर के डाकपाल सुरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की डाक नीति के अनुसार शहरी क्षेत्र में एक ही डाकघर रखने का प्रावधान है, जिसके चलते नगर परिषद के वार्ड तीन स्थित इस शाखा को बंद किया गया है। हालांकि शहरी क्षेत्र में नॉन डिलीवरी पोस्ट ऑफिस खोलने का विकल्प मौजूद है। उन्होंने बताया कि पुराना कांगड़ा की घनी आबादी और व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए उच्चाधिकारियों को नॉन डिलीवरी कार्यालय खोलने की संस्तुति भेजी गई है, जहां तीन कर्मचारी नियमित तौर पर कार्य करेंगे।
डाकपाल ने आश्वासन दिया कि जब तक नई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक बुजुर्गों की पेंशन सुविधा के लिए पुराना कांगड़ा में एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा। प्रदर्शन के दौरान आशुतोष परवान, शिवम पंडित, सतीश, मनोज काका, शशि भूषण, राजिंद्र और महिला मंडल स्वर्ण देवी की सदस्य सहित अनेक स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।