रक्कड़ (कांगड़ा)। नरसिंह मंदिर रक्कड़ में आयोजित श्रीराम कथा में कथावाचक कुंदन दास महाराज ने कहा कि जिस समय विदेशी आक्रमणकारी सनानत संस्कृति खत्म करने में जुटे हुए थे। सनातन धर्म का प्रचार करने वालों को प्रताड़ित किया जाता था। उसी समय राजापुर में जन्मे तुलसीदास ने राम चरित मानस लिखकर प्रभु श्रीराम की भक्ति का पाठ पढ़ाने का कार्य किया।
संत मोरारी बापू ने चित्रकूट तीर्थ स्थान की महिमा का वर्णन किया। कहा कि तुलसीदास को चित्रकूट के रामघाट में श्रीराम के दर्शन हुए थे। इससे वह धन्य हो गए थे। चित्रकूट में कण-कण में श्रीराम है। उन्होंने तुलसी तीर्थ को भी महान बताया। इस धरती पर तुलसी दास का जन्म हुआ है। सुंदरकांड में तीन स्थानों पर विशेष रामकथा का वर्णन किया गया है। पहले राम भक्त हनुमान ने विभीषण को रामकथा सुनाई, फिर माता सीता को तीसरी जगह रावण के दरबार में हनुमान ने काम, क्रोध लोभी रावण को रामकथा सुनाई। राम कथा से ज्ञान और विवेक का संचार होता है। कुंदन दास ने कहा कि रामचरित मानस में त्याग का बहुत बड़ा महत्व है। माता कैकेयी ने पुत्र मोह और पति मोह को त्याग कर अपने पति दशरथ से श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा। संवाद