भरमाड़ (कांगड़ा)। सरकारी वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई आगे न बढ़ने से फारिया पंचायत के ग्रामीणों में गहरा रोष पनप रहा है। पंचायत प्रधान संतोष कुमारी ने बाकायदा पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित कर वन विभाग को लिखित शिकायत प्रेषित की है। इससे पहले पूर्व पंचायत प्रधान जीवन कुमार भी वन परिक्षेत्र अधिकारी (आरओ) को इस संदर्भ में शिकायत सौंप चुके हैं।
मामले में स्थानीय वन रक्षक की ओर से भी उच्चाधिकारियों (बीओ) को रिपोर्ट भेजे जाने की पुष्टि हुई है लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो मौके की निशानदेही करवाई गई और न ही कथित कब्जे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब वर्तमान पंचायत प्रधान, पूर्व प्रधान और विभागीय फील्ड कर्मचारी तीनों स्तरों से कार्रवाई के लिए लिखा जा चुका है, तो फिर विभाग किस बात का इंतजार कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि राजस्व और वन विभाग के रिकॉर्ड का मिलान कर भूमि की तुरंत पैमाइश की जाए। यदि जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा सिद्ध होता है, तो उसे नियमानुसार तत्काल कब्जामुक्त करवाया जाए।
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अवैध गतिविधियों की आशंका पर भी जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित स्थल के आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियों और कथित तौर पर नशे के अवैध कारोबार से जुड़े होने की आशंका भी व्यक्त की है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि शांत क्षेत्र में नशे के किसी भी अवैध नेटवर्क को पनपने नहीं दिया जाएगा और प्रशासन को वन भूमि पर कब्जे के साथ-साथ इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।
वनरक्षक मोहित ने कहा कि मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर बीट ऑफिसर को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। वहीं, मामले में पक्ष जानने के लिए वन परिक्षेत्र अधिकारी आशीष और डीएफओ संदीप कोहली से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।