धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पार्किंग में मनमानी वसूली और उपभोक्ताओं कथित दुर्व्यवहार के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और ठेकेदार पर 22 लाख रुपये का दंडात्मक हर्जाना लगाया है।
साथ ही पार्किंग में मैनुअल रसीद जारी करने पर रोक लगा दी और पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने आदेश दिया कि मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में अब ठेकेदार को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से ही रसीद जारी करनी होगी।
रसीद में वाहन नंबर और प्रवेश का समय दर्ज करना अनिवार्य होगा। वाहन बाहर निकालते समय जारी रसीद में पार्किंग में बिताया समय, ठेकेदार का नाम और वसूली गई राशि भी स्पष्ट रूप से अंकित करनी होगी। वहीं, अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक शुल्क न वसूले।
आयोग ने पार्किंग व्यवस्था में कथित अनियमितता को केवल एक उपभोक्ता की शिकायत नहीं माना बल्कि अस्पताल आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों और तीमारदारों के हित से जुड़ा मामला माना है।
इसके अलावा आयोग ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को आदेश दिए हैं कि शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकद्दमेबाजी शुल्क के रूप में दिए जाएं। साथ सभी विपक्षी पक्षों, जिसमें ठेकेदार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन शामिल हैं, को जिला उपभोक्ता कानूनी सहायता कोष में 25 हजार रुपये जमा करने के आदेश भी दिए गए हैं।
यह फैसला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने सुनाया है।जानकारी के अनुसार अभिषेक शर्मा निवासी ज्वालामुखी जून में अपने परिजन के उपचार के लिए टांडा अस्पताल पहुंचे और निर्धारित पार्किंग में कार खड़ी की।
पार्किंग स्थल पर चारपहिया वाहन के लिए 20 रुपये प्रति घंटे की दर प्रदर्शित थी लेकिन वाहन निकालते समय उससे निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली गई। शिकायतकर्ता ने पार्किंग कर्मियों पर दुर्व्यवहार और वाहन रोकने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद आयोग में मामला गया। अब सुनवाई के दौरान पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
शुल्क बढ़ाने से पहले करना होगा पूरा अध्ययन
आयोग ने भविष्य में पार्किंग शुल्क बढ़ाने पर भी अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय कर दी है। दरों में वृद्धि से पहले सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, लागत-लाभ, पार्किंग की मांग और उपयोगिता का अध्ययन करना होगा। जिले और प्रदेश के समान अस्पतालों की पार्किंग दरों से तुलना करने को कहा है। इसके अलावा पार्किंग की वास्तविक क्षमता, प्रतिदिन आने वाले वाहनों की संख्या, व्यस्त समय की स्थिति और मरीजों, तीमारदारों, चिकित्सकों, कर्मचारियों, आपातकालीन वाहनों तथा आगंतुकों की जरूरतों का आकलन करना होगा। अध्ययन के बाद सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से ही नई दरें लागू की जा सकेंगी।
हर्जाने की राशि से गरीब मरीजों को दी जाएगी मदद और विद्यार्थियों को बांटे जाएंगे हेलमेट
आयोग ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को 20 लाख की हर्जाना राशि रेडक्रॉस सोसायटी कांगड़ा में 60 दिन के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं। राशि का इस्तेमाल केवल गरीब मरीजों की सहायता के लिए किया जाएगा। इसके उपयोग की निगरानी जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त कांगड़ा करेंगे। पार्किंग ठेकेदार को दो लाख रुपये पुलिस अधीक्षक कांगड़ा के पास जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस राशि का इस्तेमाल यातायात सुरक्षा को बढ़ावा देने और विशेष रूप से कॉलेज विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए हेलमेट वितरण में किया जाएगा।