पालमपुर (कांगड़ा)। भवारना में एक बाहरी व्यक्ति के नाम पर फर्जी कृषि प्रमाण पत्र हुई रजिस्ट्री का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। जिस व्यक्ति को प्रमाण पत्र में पिता दर्शाया गया है, उस व्यक्ति ने अब एसडीएम और पुलिस के पास शिकायत करने का मन बनाया है। पीड़ित अनवर मोहम्मद का कहना है कि उनके नाम पर यह प्रमाण पत्र कैसे पटवारी ने जाली बना दिया। इसकी शिकायत वह मंगलवार को एसडीएम से करेंगे। वह इसे लेकर पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि म्यूटेशन रोक कर यह कृषि प्रमाण पत्र भी रद्द कर दिया है, लेकिन अब सवाल यह उठने लगे हैं कि जब इस रजिस्ट्री में जाली कृषि प्रमाण पत्र का प्रयोग हुआ है तो अब तक इस मामले में शामिल व्यक्तियों के नाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई गई है। जबकि कानूनविदों का भी मानना है कि कृषि पत्र बनाने में हुई हेराफेरी में प्राथमिक दृष्टि एफआईआर होनी चाहिए। चर्चा यह भी होने लगी है चौकी के पटवारी का बनाया गया यह फर्जी कृषि प्रमाण पत्र पालमपुर तहसील के माध्यम से बनकर ही भवारना उपतहसील पहुंचा है। जिस पर दो राजस्व अधिकारियों के नीचे गुजरे गए इस जाली प्रमाण पत्र का पता भी किसी को कैसे और क्यों नहीं चला, क्योंकि चौकी पालमपुर उप तहसील में आता है। जबकि यह प्रमाण पत्र परिवार नकल को देख ही बनते है, जिससे सरेआम हेराफेरी की गई है। उधर, एसडीएम नेत्रा मेती ने कहा कि इस मामले में पूरे तथ्यों के साथ जांच की जा रही है। कोई दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।
हेराफेरी के इस मामले में होनी चाहिए थी एफआईआर : अरविंद
कानूनविद एडवोकेट अरविंद वशिष्ठ ने कहा कि जब इस कृषि प्रमाण पत्र में हेराफेरी हुई है तो इसकी प्राथमिक दृष्टि में 316 भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर ही होनी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हुई। इससे इसकी जांच भी प्रभावित हो सकती है।