मंडी। केंद्रीय हिंदी संस्थान नई दिल्ली के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनआईपी) -2020 भारत की बौद्धिक जड़ों से पुनर्संपर्क कराने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने जोर दिया कि 2047 तक भारत को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बौद्धिक महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
वह शनिवार को सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) मंडी में आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। प्रो. दुबे विकसित भारत-2047 में शिक्षण संस्थानों का योगदान विषय पर अपने विचार रख रहे थे। प्रो. दुबे ने कहा कि गुरुकुल प्रणाली समग्र शिक्षा और चरित्र-निर्माण पर आधारित थी। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का हवाला देते हुए कहा कि यहां की शिक्षा पद्धति संवाद, तर्क और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर केंद्रित थी।
उन्होंने एनईपी-2020 की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास, शोध और नवाचार ही नई शिक्षा नीति के केंद्र बिंदु हैं। प्रो. दुबे के अनुसार, शिक्षण संस्थानों का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जिनमें वैज्ञानिक दृष्टि, राष्ट्रभावना, नवाचार, उद्यमिता की क्षमता विकसित हो।