धर्मशाला। शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी में आपदा के पांचवें दिन शुक्रवार को सेना ने राहत एवं पुनर्बहाली अभियान की कमान संभाल ली। लगातार बारिश और दलदली हो चुकी जमीन के कारण भारी मशीनरी प्रभावित क्षेत्र तक नहीं पहुंच सकी।
ऐसे में सेना के जवानों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर गैंती और बेलचों से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया। प्राथमिकता प्रभावित गांवों तक पहुंच बहाल करने, मलबे में दबा उनका सामान निकालने और लोगों के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करने पर है।
राहत कार्य शुरू करने से पहले सेना की टीम ने पूरे प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत सर्वे किया, ताकि गढ़गून सहित अन्य प्रभावित गांवों तक जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार किया जा सके।
प्रशासन के अनुसार यदि अगले दो दिन मौसम साफ रहा तो सेना के साथ लाई गई तीन से चार जेसीबी और अन्य मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र में भेजा जाएगा। इसके बाद बड़े-बड़े पत्थरों और चट्टानों को हटाने का कार्य तेज होगा।
पहाड़ी पर अटकी तीन विशाल चट्टानों की ब्लास्टिंग भी मौसम अनुकूल होने और विशेषज्ञों की अनुमति मिलने के बाद ही शुरू की जाएगी, ताकि किसी प्रकार का अतिरिक्त जोखिम न हो।
गौरतलब है कि 21 जुलाई को बोह घाटी में बादल फटने के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन से रुलेहड़, बंगार, गढ़गूंन और स्पैड़ा गांवों में भारी तबाही हुई थी। आपदा में एक स्कूल, 18 मकान और नौ गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जबकि कई संपर्क मार्ग मलबे में दब गए। प्रशासन अब राहत कार्य के साथ-साथ पुनर्वास की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। प्रभावित करीब 38 परिवारों के पुनर्वास के लिए बोह में ही वैकल्पिक भूमि चिह्नित की गई है, जिस पर अंतिम निर्णय के बाद जमीन आवंटित की जाएगी।
शाहपुर की बोह पंचायत के गढगून गांव में सेना के जवान लोगों दबे घरों का मलबा हटाते हुए। स्रोत: ग्