धर्मशाला। कांगड़ा जिले के लदवाड़ा का पारंपरिक हस्तशिल्प अब देश की राजधानी दिल्ली में अपनी चमक बिखेरेगा। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में जुटीं लदवाड़ा की मनीषा को दिल्ली में 11 अक्तूबर से आयोजित होने वाले चार दिवसीय नवरात्र उत्सव में अपने पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का स्टॉल लगाने का अवसर मिला है।
इस मंच के माध्यम से चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल्स) से तैयार कानों के आकर्षक झूमके, लाउंड्री बास्केट, रोटी का डिब्बा, फूलदान और चाबी के छल्ले जैसे हस्तनिर्मित उत्पाद दिल्ली के बड़े बाजार में प्रदर्शित किए जाएंगे। मनीषा इससे पहले भी दिल्ली में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। वे लंबे समय से हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने के कार्य से जुड़ी हैं।
अब तक गांव की करीब 20 महिलाओं को इस काम से जोड़ चुकी हैं, जिससे उन्हें घर के कामकाज के साथ नियमित आय का साधन मिल रहा है। मनीषा ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उनके हुनर को सही बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है। दिल्ली के नवरात्र उत्सव में स्टॉल मिलने से उनके उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे आने वाले समय में अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।