धर्मशाला के समृद्धि भवन में सरस्वती माता की पेंटिंग को अंतिम रूप देते हुए कलाकार। अमर उजाला
- फोटो : मोनिका
धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के नए समृद्धि भवन में अतिथियों का स्वागत जल्द ही कांगड़ा की समृद्ध संस्कृति, लोकजीवन और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक से होगा।
भवन के प्रवेश क्षेत्र को आकर्षक बनाने के लिए सीमेंट कलाकृति के माध्यम से गद्दी संस्कृति, तिब्बती समुदाय, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और चाय बागानों को जीवंत रूप दिया जा रहा है। इस विशेष कार्य को बिलासपुर के प्रसिद्ध मूर्तिकार विजय राज उपाध्याय अंजाम दे रहे हैं। करीब एक माह से चल रहे निर्माण कार्य के तहत दीवारों पर उभरी हुई कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। काम पूरा होने के बाद इन्हें रंगों से सजाया जाएगा जिससे पूरी कलाकृति और अधिक आकर्षक और जीवंत दिखाई देगी।
कलाकृति में हिमाचल के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गद्दी समुदाय के रहन-सहन, पहनावे और जीवनशैली को भी दर्शाया जा रहा है। कांगड़ा की पहचान माने जाने वाले चाय बागानों को भी इसमें विशेष स्थान दिया गया है।
विजय राज उपाध्याय ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल दीवारों को सजाना नहीं बल्कि कला के माध्यम से स्थानीय विरासत को लोगों तक पहुंचाना है। रंगों का काम पूरा होने के बाद यह कलाकृति भवन की सुंदरता में और निखार लाएगी। नगर निगम की यह पहल समृद्धि भवन को नई पहचान देने के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करेगी।
उम्मीद है कि यह कलात्मक दीवार आने वाले समय में भवन का प्रमुख आकर्षण और लोगों के लिए फोटो प्वाइंट बनेगी। संवाद
धर्मशाला के समृद्धि भवन में सरस्वती माता की पेंटिंग को अंतिम रूप देते हुए कलाकार। अमर उजाला- फोटो : मोनिका