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ज्वालामुखी मंदिर चढ़ावा मामला : आपत्तियां लगा जिला प्रशासन ने लौटाई जांच रिपोर्ट

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धर्मशाला। एसडीएम की ओर से ज्वालामुखी मंदिर चढ़ावा मामले की भेजी गई जांच रिपोर्ट को जिला प्रशासन ने कुछ आपत्तियों के साथ वापस भेज दिया है। एसडीएम ज्वालामुखी की जांच रिपोर्ट से जिला प्रशासन संतुष्ट नहीं है। जिला प्रशासन ने आपत्तियों के सही जवाब के साथ नई विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि 28 दिसंबर, 2024 को एक श्रद्धालु की ओर से माता के मंदिर में सोने की नथ चढ़ाई गई थी लेकिन मंदिर कर्मचारियों ने इसकी रजिस्टर पर एंट्री 31 दिसंबर को दर्ज की। एंट्री में देरी का कारण रविवार को ज्वालामुखी बाजार बंद रहने के कारण सोने की शुद्धता की जांच न होना बताया।
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वहीं, जिला प्रशासन को भेजे अपने जवाब में शिकायतकर्ता ने कहा कि मंदिर के कर्मचारी झूठ बोलकर जिला प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। क्योंकि रविवार को ज्वालामुखी बाजार खुला रहता है। इन विरोधाभासी बयानों के कारण जिला प्रशासन ने एसडीएम ज्वालामुखी से सही रिपोर्ट देने को कहा है। यह भी सामने कि इस मामले को एक नेता के इशारे पर दबाने का प्रयास हुआ है। इससे नेता के प्रति भी लोगों ने रोष जताया है। बता दें कि प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता ज्वालाजी मंदिर में सोने की नथ की एंट्री में बरती गई अनियमितता के मामले को चार महीने के बाद भी मंदिर प्रशासन सुलझा नहीं पाया है। इससे विभिन्न हिंदू संगठनों और माता के प्रति आस्था रखने वाले लाखों श्रद्धालुओं में रोष है। पिछले चार माह से महज चिट्ठियों का दौर चला हुआ है लेकिन इस मामले में परिणाम अभी तक शून्य है। उधर, कार्यकारी एडीएम कांगड़ा राम प्रसाद शर्मा ने कहा कि जांच रिपोर्ट को कुछ आपत्तियों के साथ एसडीएम ज्वालामुखी को वापस भेजा है।
अभी नहीं मिली रिपोर्ट : एसडीएम

एसडीएम ज्वालामुखी संजीव शर्मा ने कहा कि हमारे कार्यालय से जांच रिपोर्ट उपायुक्त कांगड़ा को भेज दी गई है। जांच में किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई है। हालांकि चढ़ावे की एंट्री में कुछ देरी जरूर हुई है लेकिन किसी की जानबूझ कर ऐसा नहीं किया। अभी तक जिलाधीश से जांच रिपोर्ट वापस नहीं आई है, जब आएगी तब कुछ बता पाएंगे।
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माता ज्वालाजी मंदिर के प्रति करोड़ों हिंदुओं की आस्था है। श्रद्धालु की ओर से भेंट की गई सोने की नथ की सही समय पर रजिस्टर पर एंट्री क्यों नहीं हो पाई और शिकायत के बाद ही इसकी एंट्री कैसे हुई, यह गंभीर मामला है और जांच का विषय है। जिला प्रशासन को इस मामले में उचित कार्रवाई अमल में लानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की बातें सामने न आएं।
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-एडवोकेट रोहित शर्मा, वाइस चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल
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