देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। नगर परिषद देहरा के चुनाव नतीजे सामने आते ही सियासी गलियारों में नई बिसात बिछनी शुरू हो गई है। दो दशक बाद नगर परिषद देहरा में कांग्रेस समर्थित पांच प्रत्याशियों की जीत ने जहां पार्टी में उत्साह भर दिया है। अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर अंदरखाते लॉबिंग शुरू हो गई है। नगर परिषद के सात वार्डों में से पांच पर कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं।
देहरा की राजनीति में अब असली मुकाबला चुनाव जीतने के बाद कुर्सी हासिल करने को लेकर है। अध्यक्ष पद की दौड़ में निष्ठा चंबियाल और उपासना सूद के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए सियासी हलकों में नरेश कुमार का नाम चर्चा में है। विजयी उम्मीदवारों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की गोटियां फिट करने के लिए अंदरखाते समर्थन जुटाना और दबाव बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर इन चुनाव नतीजों ने भाजपा संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी को पूरी तरह उजागर कर दिया है। चुनाव की शुरुआत में जीत के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा केवल दो सीटों पर सिमट गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देहरा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के बड़े चेहरों पूर्व विधायक होशियार सिंह, पूर्व मंत्री रमेश धवाला और पूर्व मंत्री रविंद्र रवि के समर्थकों के बीच आपसी खींचतान और समन्वय की कमी भाजपा समर्थित प्रत्याशियों पर भारी पड़ी। कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता के कारण भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को अपने दम पर चुनाव लड़ना पड़ा।
इसके विपरीत कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को विधायक और संगठन का पूरा साथ मिला, जिसका सीधा फायदा उन्हें नतीजों में मिला। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि देहरा भाजपा ने अपनी अंदरूनी कलह जल्द खत्म नहीं की तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।