जसूर (कांगड़ा)। प्रदेश में अवैध रूप से खतरनाक अमोनिया गैस के उपयोग का मामला गंभीर रूप से उभरकर सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से हुए खुलासे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कनोहत्रा ने सरकार और वन विभाग पर लापरवाही और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शुक्रवार को नूरपुर में पत्रकारवार्ता के दौरान कनोहत्रा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 29 अप्रैल 2008 को जारी अधिसूचना में औद्योगिक इकाइयों में अमोनिया गैस के उपयोग की सीमा निर्धारित की थी। नियमों के अनुसार, प्रति यूनिट अधिकतम 40 मीट्रिक टन गैस के उपयोग की अनुमति है लेकिन प्रदेश में कई कत्था यूनिटें इस सीमा से कई गुना अधिक गैस का उपयोग कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 14 कत्था यूनिटों में अमोनिया गैस का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। कई इकाइयों ने बिना अनुमति एयर कंडीशनिंग और कूलिंग चैंबर यूनिटें भी स्थापित कर ली हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में अमोनिया गैस रिसाव का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने 13 फरवरी को वन विभाग ऊना को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने डीएफओ ऊना पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनका बयान भ्रामक है और यह वर्ष 2008 की अधिसूचना के विपरीत जानकारी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सरकार और विभागों की चुप्पी चिंताजनक है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि अमोनिया गैस के नियमों का उल्लंघन करने वाली सभी यूनिटों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। अवैध गैस संयंत्रों को बंद किया जाए और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।