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Kangra News: पुनर्मूल्यांकन-पुनर्निरीक्षण में 15 से 20 अंक बढ़े तो नपेंगे शिक्षक

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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाने जा रहा है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि पुनर्मूल्यांकन या पुनर्निरीक्षण के दौरान किसी छात्र के अंकों में 15 से 20 अंकों की बढ़ोतरी पाई जाती है, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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बोर्ड का यह फैसला पिछले कुछ वर्षों में पुनर्मूल्यांकन के लिए आने वाले आवेदनों की बाढ़ को देखते हुए लिया गया है। बड़ी संख्या में आवेदन न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि इससे बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठती हैं। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में अंकों का अंतर आना शिक्षकों की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
अक्सर देखा गया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्रों के अंक 50 से सीधे 85 तक पहुंच जाते हैं। इससे न केवल मूल परिणाम की विश्वसनीयता कम होती है, बल्कि राज्य की मेरिट सूची भी प्रभावित होती है। बोर्ड ने सभी मूल्यांकनकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे उत्तरपुस्तिकाओं की जांच पूरी ईमानदारी और सतर्कता के साथ करें ताकि छात्रों को उनके परिश्रम का सही फल मिल सके और बेवजह के विवादों से बचा जा सके।
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उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में इस बार पारदर्शिता लाई जा रही है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ अंकों का निर्धारण करें। अगर पुनर्मूल्यांकन के दौरान 15 से 20 अंक बढ़ते हैं, तो मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -डॉ. राजेश शर्मा, अध्यक्ष, स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला
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