मर्चेंट नेवी में कार्यरत रक्षित से परिजनों की आखिरी बातचीत सात जनवरी को हुई थी। पिता रणजीत सिंह चौहान ने बताया कि उस समय बेटे ने परिवार को चिंता से बचाने के लिए यह कह दिया था कि वह बर्फीले और सिग्नल-विहीन क्षेत्र में जा रहा है, इसलिए करीब दो महीने तक संपर्क नहीं हो पाएगा। लेकिन आठ जनवरी को यूट्यूब पर जहाज के जब्त होने की खबर देखकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
रक्षित की सुरक्षित रिहाई के लिए हिमाचल से लेकर दिल्ली तक लगातार प्रयास होते रहे। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने मामला सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के समक्ष उठाया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय से सीधे संपर्क साधा गया। कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा भी लगातार दूतावास के संपर्क में रहे और परिवार को स्थिति की जानकारी देते रहे। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी रक्षित के घर जाकर परिवार को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया था।