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Kangra News: अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी से चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं

Sun, 15 Sep 2024 08:52 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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कांगड़ा जिले में डाक्टरों के 64, स्टाफ नर्स-लैब तकनीशियन के 108 पद खाली
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अस्पतालों में मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रहा उपचार
सरकारी अस्पतालों में 28 में से 26 ऑपरेशन थियेटर सहायकों के पद खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। जिला कांगड़ा के स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराने लगी हैं। स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए उन्हें या तो टांडा मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जिला कांगड़ा के स्वास्थ्य संस्थानों में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स के पांच पद खाली चल रहे हैं।

वहीं, मेडिकल ऑफिसर्स के 59 और डेंटल चिकित्सकों के पांच पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा सुपरिंटेंडेंट के पांच और लिपिक के 61 पद खाली हैं। इस वजह से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं लैबों में मरीजों के टेस्ट करने वाले लैब तकनीशियनों के 41 और स्टाफ नर्सों के 67 पद खाली हैं, जिन्हें सरकार की ओर से नहीं भरा जा रहा है।
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जिले के कई अस्पतालों में विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों के अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पा रहे हैं, इसका खामियाजा गर्भवती महिलाओं के साथ पेट की समस्या से संबंधित मरीजों को झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य कई पद खाली होने से सरकार की ओर से दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को सही से नहीं मिल पा रही हैं। सरकार की लचर व्यवस्था के कारण स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार होने लगा है। वहीं, बजट में भी कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में डाक्टरों और नर्सों की कमी के कारण मजबूरन मरीजों को अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, विशेषज्ञों की कमी के कारण कई अस्पतालों में केवल एक भी विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। अगर वे छुट्टी पर चले जाते हैं तो मरीजों का मर्ज बढ़ जाता है और उन्हें उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
इनसेट:

मात्र दो ओटीए के सहारे जिला कांगड़ा

जिले के धर्मशाला, नूरपुर और पालमपुर अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में केवल दो ही ऑपरेशन थिएटर सहायक मौजूद हैं और 26 पद खाली चल रहे हैं। इस वजह से अन्य अस्पतालों में किसी प्रकार के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को भी सीजेरियन डिलिवरी के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
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कोट्स:

जिला कांगड़ा के स्वास्थ्य संस्थानों में खाली चल रहे पदों के बारे में सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है। जैसे ही सरकार की ओर से मंजूरी मिलेगी तो इन खाली पदों को भरा जाएगा, जिससे की मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़ सके।

- डॉ. राजेश सूद, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कांगड़ा
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