डीडीयूजीकेवाई के तहत पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर
धर्मशाला में आठ राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें नियमित रोजगार उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयूजीकेवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए परियोजना कार्यान्वयन समितियों से यह आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए भी गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है।
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में डीडीयूजीकेवाई की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण तकनीकी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से वंचित रहने वाले ग्रामीण युवाओं के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी है। योजना के माध्यम से युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और आपसी संवाद योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उपयोगी साबित होता है। ऐसी कार्यशालाओं में मिलने वाले सुझावों से योजना को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां विकास कार्यों और आधारभूत ढांचे के निर्माण में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतियां हैं। इसलिए योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश सहित जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंत्री ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने का भी आह्वान किया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक (कौशल) पवन कुमार, अवर सचिव घनश्याम मीणा, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राघव शर्मा, सीईओ एचपीएमआरएलएम सुरेंद्र मोहन और डीडीओ ग्रामीण विकास कांगड़ा अभिनीत कात्यायन ने भी विचार रखे।