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Kangra Cloudburst: गढ़गून और भंगार गांव जमींदोज, स्पैड़ा में खतरा बरकरार, खाली कराए तीनों गांव, देखें वीडियो

Wed, 22 Jul 2026 06:25 PM IST
Krishan Singh सौरभ सूद, संवाद न्यूज एजेंसी, बोह (शाहपुर)।

सार

दरकता पहाड़ और गांवों में पसरा सन्नाटा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने के बाद केलंग नाले का रौद्र रूप देख गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। 
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स्पेड़ा गांव में जमींदोज हो गए चार मकान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मलबा, टूटी दीवारें और उजड़े आशियाने। दरकता पहाड़ और गांवों में पसरा सन्नाटा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने के बाद केलंग नाले का रौद्र रूप देख गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। गढ़गून और भंगार गांव जमींदोज हो चुके हैं। पहाड़ अब भी दरक रहा है। स्पैड़ा गांव पर खतरा लगातार बना हुआ है। प्रशासन ने एहतियातन तीनों गांव खाली करवा दिए हैं। तीनों गांवों के 38 परिवार बेघर हैं। 160 लोगों को बोह के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बनाए अस्थायी राहत शिविर में ठहराया गया है जबकि कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। अमर उजाला के लिए संवाद की टीम ने बुधवार को प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर हालात का जायजा लिया। गढ़गून गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद गांव की सीमा शुरू होती है। लेकिन गांव नजर नहीं आता। वहां सिर्फ पत्थरों, पेड़ों और मलबे का ढेर दिखाई देता है। जिन आंगनों में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। सैलाब ने गांव के 12 मकानों को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया है। सरकारी प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी बह गए हैं। खेत, पेयजल योजनाएं, बिजली के खंभे और गांव को जोड़ने वाला रास्ता तबाह हो चुका है। मलबे के नीचे दबकर दर्जनों पशु मारे गए हैं।

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गढ़गून के साथ लगा भंगार गांव भी इस त्रासदी से अछूता नहीं बचा। यहां तीन परिवारों के मकान पूरी तरह रहने योग्य नहीं रहे। घरों के भीतर रखा सामान, अनाज, जरूरी दस्तावेज और वर्षों की मेहनत पल भर में मलबे के नीचे दब गई। ग्रामीणों की आंखों में अब भी वही मंजर ताजा है, जब सैलाब आया और देखते ही देखते सब कुछ बहा ले गया। त्रासदी का सबसे भयावह पहलू यह है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ। ऊपरी पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। स्पैड़ा गांव के करीब 12 घर मलबे की चपेट में आ चुके हैं जबकि 11 अन्य मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। करीब 27 परिवारों वाले इस गांव के लोग अब अपने घरों से दूर राहत शिविरों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। हर किसी की निगाह पहाड़ी की ओर टिकी है कि कहीं फिर से मलबा न आ जाए। राहत शिविर में भोजन और ठहरने की व्यवस्था तो है, लेकिन जिन लोगों ने अपना घर, खेत और पशुधन खो दिया है, उनके चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ दिखाई देती है। आपदा की मार सिर्फ तीन गांवों तक सीमित नहीं। बोह पंचायत के लाम गांव में भी जमीन दरकने लगी है। करीब 60 घरों वाले इस गांव में 50 मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं, जबकि छह मकान पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन लगातार फट रही है। लोग रातें जागकर बिता रहे हैं और हर हलचल उन्हें नए खतरे का अहसास करा रही है।

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सीएम ने डीसी कांगड़ा से की बात, लोगों की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं की बहाली के निर्देश
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को शिमला से कांगड़ा जिला की बोह घाटी में बादल फटने की घटना के संबंध में उपायुक्त हेमराज बैरवा और प्रभावित परिवारों से दूरभाष पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बादल फटने से हुए नुकसान, स्थानीय लोगों की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं की बहाली तथा जिला प्रशासन की ओर से स्थिति से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए जिला प्रशासन को सभी प्रभावित परिवारों को शीघ्र और हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। सुक्खू ने कहा कि वे शीघ्र ही प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्वयं नुकसान का आकलन करेंगे। जिन परिवारों के मकान इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी को देखते हुए प्रभावित परिवारों से भारी वर्षा के दृष्टिगत सतर्क रहने की अपील की। उपायुक्त ने मुख्यमंत्री को प्रभावित क्षेत्र की वर्तमान स्थिति से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
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डीसी भी पहुंचे पैदल, बोले - गढ़गून में एक भी मकान नहीं बचा
बुधवार शाम उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर गढ़गून गांव पहुंचे। उन्होंने मौके पर नुकसान का जायजा लेने के बाद कहा कि गांव में एक भी मकान सुरक्षित नहीं बचा है। प्रशासन ने तीनों गांव खाली करवा दिए हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नुकसान का विस्तृत आकलन कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
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