बीड़ (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा के दुर्गम क्षेत्र छोटा और बड़ा भंगाल में फैले धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य में प्रवेश के लिए वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। प्रदेश सरकार की छह जून को जारी अधिसूचना के बाद विभाग ने नियम लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अभयारण्य में प्रवेश और निकास के समय पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए राजगुंधा स्थित वन विभाग के कंट्रोल रूम में व्यवस्था की गई है। बड़ा भंगाल के निवासियों और अभयारण्य में हक-हकूक रखने वालों को प्रवेश शुल्क से छूट रहेगी।
अभयारण्य में प्रवेश से पहले और लौटने के बाद पंजीकरण करवाना होगा। वन विभाग के वन मित्र बड़ा भंगाल में भी पंजीकरण करेंगे। चंबा की ओर से बाहर निकलने वाले लोगों की जानकारी भी विभाग तक पहुंचेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई होगी।
भारतीयों के लिए 300, विदेशियों के लिए 600 रुपये प्रतिदिन शुल्क
अधिसूचना के अनुसार, भारतीय पर्यटकों को पहले तीन दिन 300 रुपये प्रतिदिन और इसके बाद 500 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क पहले तीन दिन 600 और इसके बाद 1000 रुपये प्रतिदिन होगा। स्कूली विद्यार्थियों को शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। स्टिल कैमरे के लिए भारतीयों को पहले तीन दिन 625 और इसके बाद 1250 रुपये प्रतिदिन देने होंगे। विदेशियों के लिए यह शुल्क क्रमशः 1250 और 2500 रुपये है। सिने कैमरे का शुल्क इससे अधिक है। ड्रोन के इस्तेमाल के लिए विशेष अनुमति जरूरी होगी। व्यावसायिक उपयोग पर 10 हजार से 75 हजार रुपये प्रतिदिन तक शुल्क निर्धारित है।
ऑनलाइन टिकट के लिए वेबसाइट होगी लांच
वन विभाग अभयारण्य के लिए वेबसाइट विकसित कर रहा है। इसके शुरू होने पर पर्यटक ऑनलाइन भुगतान कर प्रवेश टिकट प्राप्त कर सकेंगे। वेबसाइट पर अभयारण्य से जुड़ी वास्तविक समय की जानकारी भी उपलब्ध करवाने की योजना है। वेबसाइट जल्द लॉन्च की जाएगी।
कोटस
प्रदेश सरकार की छह जून को जारी अधिसूचना के बाद विभाग ने नियम लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अभयारण्य में प्रवेश और निकास के समय पंजीकरण करवाना होगा। इसके अलावा यहां आने वाले भारतीय पर्यटकों व विदेशी पर्यटकों को पर्यटन व फोटोग्राफी के लिए शुल्क चुकाने होंगे। इसके लिए दरें तय की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई होगी। -रेजिनाल्ड रॉयस्टन, डीएफ, वन्यप्राणी विभाग, हमीरपुर