फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kangra News: पर्यटन निगम के होटलों में महंगा हो सकता है खाना

Mon, 30 Mar 2026 01:40 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
विज्ञापन
विज्ञापन
धर्मशाला। पर्यटन उद्योग पर अब व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कमी का असर दिखने लगा है। निजी होटलों और ढाबों के बाद अब संकट की यह आंच पर्यटन विकास निगम के रसोईघरों तक पहुंच गई है। सिलिंडरों की सुचारू सप्लाई न मिलने के कारण निगम के होटलों में अब आधुनिक गैस चूल्हों की जगह पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों और डीजल की स्टोव भट्ठियों ने ले ली है।
विज्ञापन

यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में पर्यटन निगम के होटलों में खाना खाना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ सकता है। वर्तमान में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालक व्यावसायिक गैस की अनियमित सप्लाई से जूझ रहे हैं। पर्यटन निगम के होटलों को मिलने वाले सिलिंडर कोटे में भी भारी कटौती की गई है।
हालांकि, प्रबंधन अभी तक पुराने और पूर्व निर्धारित दामों पर ही पर्यटकों को खान-पान की वस्तुएं उपलब्ध करवा रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे व्यवस्था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। गैस की कमी के चलते कई छोटे कारोबारी तो अब नए ऑर्डर लेने से भी परहेज करने लगे हैं, जिसका सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है।
विज्ञापन

पारंपरिक संसाधनों का सहारा
गैस सिलिंडरों की भारी कमी को देखते हुए निगम के होटलों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी और कोयले का प्रयोग शुरू कर दिया है। पर्यटन निगम के धर्मशाला स्थित यूनिटों में फिलहाल मेन्यू में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बैकअप प्लान के तहत पारंपरिक चूल्हों पर ही अधिकांश भोजन तैयार किया जा रहा है।
एजीएम का दोटूक: बढ़ सकते हैं दाम
पर्यटन विकास निगम धर्मशाला के एजीएम कैलाश ठाकुर ने कहा कि वर्तमान में सिलिंडर सप्लाई में कटौती के कारण हम पारंपरिक व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं। यदि सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और कोटे में यही कटौती जारी रही तो निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार होटलों के मेन्यू कार्ड में बदलाव कर खाने के दामों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
छोटे कारोबारियों की टूटी कमर
व्यावसायिक गैस की किल्लत का सबसे बुरा असर छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ा है। सिलिंडर न मिलने के कारण वे डीजल भट्ठियों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। ऐसे में कई ढाबा संचालकों ने चोरी-छिपे घरेलू सिलिंडरों का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जो किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें