धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला में शिक्षा विभाग की दो अधिकारियों के बीच कार्यालय भवन को लेकर जद्दोजहद चल रही है। हालात यह हैं कि शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल एवं डीपीओ को ज्वाइनिंग के एक माह बाद भी स्थायी भवन नहीं मिल पाया। दरअसल प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष 31 दिसंबर को शिक्षा उपनिदेशकों के खाली पदों पर नियुक्तियों के आदेश जारी किए थे। नए नियुक्ति आदेशों के तहत कंचन ज्योति को शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल एवं डीपीओ बनाया गया। प्रदेश शिक्षा विभाग के सचिव के आदेश हैं कि शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल एवं डीपीओ जिले के अंतर्गत चल रहे जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के कार्यालय में बैठेंगे।
जिला परियोजना अधिकारी की शक्तियां डाइट प्रधानाचार्य से वापस लेकर अब शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल को सौंपी गई हैं। डीपीओ को सर्व शिक्षा अभियान समेत शिक्षा विभाग की विभिन्न परियोजनाओं को संचालित करना होता है। वहीं, विभाग में उपनिदेशक एवं डीपीओ का पद उच्च माना जाता है। इस लिहाज से डाइट में संबंधित अधिकारी के बैठने के लिए पर्याप्त जगह वाला कार्यालय होना चाहिए। लेकिन, डाइट धर्मशाला में बड़े कार्यालय में डाइट की प्रधानाचार्य बैठती हैं। उनका कहना है कि संस्थान प्रमुख होने के नाते यह कक्ष शुरू से प्रधानाचार्य के पास है। ऐसे में इसको शिक्षा उपनिदेशक एवं डीपीओ के सुपुर्द नहीं किया जा सकता। हालांकि शिक्षा उपनिदेशक को संस्थान परिसर में ही अलग से कमरा उपलब्ध करवाया गया है। लेकिन, वह छोटा है। ऐसे में करीब 20 से 22 दिन डाइट परिसर में कार्यालय कक्ष को लेकर चली जद्दोजहद के बाद अब शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल एवं डीपीओ वापस धर्मशाला के कचहरी चौक स्थित खंड स्रोत समन्वयक कार्यालय भवन में लौट आई हैं। यहां पर शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्राेल एवं डीपीओ, तीन खंड प्राइमरी शिक्षा अधिकारी, तीन स्कूल प्रधानाचार्य और एक लिपिक बैठ रहे हैं।
डाइट प्रधानाचार्य नीना पुन ने इस बारे कुछ भी जानकारी नहीं दी। जबकि शिक्षा उपनिदेशक क्वालिटी कंट्रोल एवं डीपीओ कंचन ज्योति ने कहा कि वह डाइट परिसर और कचहरी चौक स्थित बीआरसी कार्यालय भवन दो जगह कार्यालय संभाल रही हैं। डाइट प्रभारी से कार्यालय की ड्राइंग मांगी गई है। ड्राइंग देखकर ही पता चलेगा कि किसका कार्यालय कहां पर है।