धर्मशाला। जरूरत के समय ली गई उधार रकम वापस न लौटाना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। पालमपुर स्थित वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश गौरव कुमार की अदालत ने धन वसूली के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए वादी के पक्ष में 1,70,000 रुपये की डिक्री पारित की है।
अदालत ने प्रतिवादी को मूल राशि के साथ मुकदमा दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही मुकदमे का सारा खर्च भी प्रतिवादी को ही वहन करना होगा। जून 2023 में दायर मुकदमे के अनुसार, प्रतिवादी ने अगस्त 2022 में वादी से 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी थी।
इस पर वादी ने 1,20,000 रुपये चेक और 50,000 रुपये नकद के रूप में कुल 1.70 लाख रुपये उपलब्ध कराए थे। प्रतिवादी ने यह रकम दो माह के भीतर लौटाने का वादा किया था, लेकिन बाद में मई 2023 में वह राशि लौटाने से मुकर गया। प्रतिवादी ने अदालत में चेक से 1.20 लाख रुपये लेना तो स्वीकार किया, लेकिन दावा किया कि उसने यह राशि एक महीने में नकद लौटा दी थी।
वहीं, उसने 50 हजार रुपये नकद लेने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि अपने दावों को साबित करने का जिम्मा प्रतिवादी पर था, जिसे वह पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। अदालत ने वादी की 18 प्रतिशत ब्याज की मांग को संशोधित करते हुए 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर भुगतान करने के आदेश दिए।