धर्मशाला। दीवानी विवादों के निपटारे के लिए आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल पक्षकारों के बीच निजी विवाद सुलझाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा स्थित धर्मशाला की अदालत ने भूमि पर कथित अतिक्रमण और चारदीवारी तोड़ने से जुड़े मामले में यह टिप्पणी करते हुए शिकायतकर्ता की विरोध याचिका को खारिज कर दिया है।
अदालत ने थाना धर्मशाला पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार करते हुए केस फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने के आदेश दिए हैं। यह मामला जुलाई 2024 में थाना धर्मशाला में आईपीसी की धारा 447 और 427 के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपियों ने साथ लगती भूमि खरीदने के बाद उसकी जमीन पर जबरन कब्जा किया और चहारदीवारी को क्षतिग्रस्त कर दिया।
राजस्व विभाग की निशानदेही में कुछ हिस्से पर अतिक्रमण सामने आया था। मगर जांच में यह भी पाया गया कि इसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों के दीवानी मुकदमे पहले से ही सिविल कोर्ट में लंबित हैं।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. हकीकत ढांडा ने आदेश में स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्षों के बीच भूमि विवाद को लेकर दीवानी मुकदमे पहले से विचाराधीन हैं तो इस स्तर पर आपराधिक याचिका में लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना जा सकता। इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने शिकायतकर्ता की आपत्तियों को खारिज कर पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को मंजूरी दे दी।