हिमाचली प्रदेश के साहित्यकार दिवंगत डॉ. प्रत्यूष गुलेरी का मंगलवार को चरान खड्ड स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान कई हस्तियां मौजूद रहीं। बेटे विशाल गुलेरी ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
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डॉ. प्रत्यूष गुलेरी के निधन को साहित्यकारों ने साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति बताया है। वह पिछले कई दशकों से निरंतर साहित्य की सेवा कर रहे थे। नील गगन पर चमके तारे... उनका लिखा बालगीत आज भी हर जुबां पर है।
उनका जन्म 9 जून, 1947 को पिता कीर्तिधर शर्मा गुलेरी और माता सत्यावती गुलेरी के घर गुलेर, जिला कांगड़ा में हुआ। हिंदी साहित्य में डॉक्टरेट करने के बाद उन्होंने कई शैक्षणिक पदों पर अपनी सेवाएं दीं। उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले।