-अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 17 साल के रिश्ते को किया समाप्त
-2020 में घर से निकाल दी पत्नी, खर्च न उठाने का भी आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। नशे में पत्नी को पीटना, घर से बाहर निकालना और बेटियों से दूर रखना तलाक की वजह बनी है। न्यायालय ने तथ्यों को जांचने के बाद 17 साल के वैवाहिक रिश्ते को समाप्त करने का फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता ने पति पर वर्ष 2020 में घर से निकालने और बेटियों को भी जबरन अपने पास रखने के आरोप लगाए थे। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय पालमपुर धीरू ठाकुर की अदालत ने तलाक याचिका को स्वीकार करते हुए पति-पत्नी के विवाह को हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत क्रूरता के आधार पर समाप्त करने का फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता ने याचिका में आरोप लगाया था कि वर्ष 2009 में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह होने के बाद प्रारंभिक समय में संबंध सामान्य रहे। बाद में पति शराब पीकर पीटने लगा और अकसर उसे घर से बाहर निकाल देता था। पत्नी ने अदालत को बताया कि जनवरी 2020 में पति ने उसे पीटकर घर से निकाल दिया। इसके बाद वह मायके में रहने लगी। पति ने कभी भी उसका खर्च नहीं उठाया और दोनों बेटियों को अपने पास रखा। मां को बेटियों से मिलने तक नहीं दिया जिससे उसे मानसिक पीड़ा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
मामले में प्रतिवादी पति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और उसे एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) करार दिया गया। इसके बाद पत्नी ने साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत में पत्नी ने कहा कि पति उसके चरित्र पर संदेह करता था। आर्थिक रूप से भी उसे प्रताड़ित करता रहा। न्यायालय ने माना कि मां को उसकी बेटियों से दूर रखना स्थिति को और गंभीर बनाता है। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पत्नी की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों के विवाह को क्रूरता के आधार पर समाप्त घोषित कर दिया।