परागपुर (कांगड़ा)। गरली और परागपुर धरोहर गांवों को लेकर मंगलवार को विधानसभा में किए गए सरकारी दावों ने क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि परागपुर गांव पर 52 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। स्थानीय संगठनों के लिए यह बात अविश्वसनीय और हैरान करने वाली रही।
गांव की गलियों से लेकर लोगों की बैठकों तक यही सवाल उठ रहा है कि यह 52 लाख रुपये वास्तव में कहां और किस काम में खर्च हुए। युवा विकास मंडल परागपुर के संयोजक शिव शाह और परागपुर विकास परिषद के संयोजक हंसराज शाह ने कहा कि यह खर्च सिर्फ कागजों में नजर आता है, जमीन पर कोई बदलाव या सुधार दिखाई नहीं देता।
दोनों गांव धरोहर दर्जा पाए हुए हैं, लेकिन आज भी उनका हाल वर्षों से बदहाल जैसा ही है। स्थानीय संगठनों ने पर्यटन विभाग से मांग की है कि जनता को स्पष्ट किया जाए कि यह राशि कहां और किस कार्य में खर्च हुई। साथ ही, यह भी बताया जाए कि मुख्यमंत्री को यह जानकारी किस अधिकारी ने दी और यदि भ्रमित किया गया है तो उस अधिकारी का नाम और पद जनता के सामने लाया जाए।