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धर्मशाला: दलाई लामा बोले- जीवन में करुणा, अहिंसा और आंतरिक शांति का बहुत महत्व

Wed, 25 Mar 2026 07:18 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।

सार

14वें दलाई लामा ने बुधवार को मैक्लोडगंज स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर चुगलाखांग मंदिर में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह में भाग लिया। 
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तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा। - फोटो : ANI
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विस्तार
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तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा ने बुधवार को मैक्लोडगंज स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर चुगलाखांग मंदिर में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह में भाग लिया। यह विशेष प्रार्थना उत्संग क्षेत्र, दोखाम जाचुका संगठन और क्यिडोंग कल्याण सभा की ओर से अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भिक्षु-भिक्षुणियां और तिब्बती समुदाय के लोग उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर कोई अपने प्रिय गुरु के दीर्घ, स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन की कामना करता नजर आया। समारोह के दौरान पारंपरिक तिब्बती रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। बौद्ध भिक्षुओं के मंत्रोच्चारण और सामूहिक प्रार्थनाओं से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

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इस अवसर पर दलाई लामा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए करुणा, अहिंसा और आंतरिक शांति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारे मन की शांति और संतुलन से उत्पन्न होता है। उन्होंने लोगों को परस्पर प्रेम, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि प्रार्थना तभी सार्थक होती है जब उसे दैनिक जीवन में अच्छे कर्मों और सकारात्मक सोच के साथ जोड़ा जाए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस क्षण को अपने जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण अनुभव बताया। बौद्ध अनुयायियों ने कहा कि दीर्घायु प्रार्थना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि तिब्बती संस्कृति, आस्था और सामुदायिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक भी है, जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का कार्य करता है।
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