धर्मशाला। प्रदेश में गर्मी और बरसात के मौसम में सांप के डसने के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों में समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति और मौत को टाला जा सकता है।
इस साल अभी तक टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सर्पदंश के 263 मामले सामने आए हैं। इनमें मेडिसिन विभाग में 192 और बाल रोग विभाग में 71 मरीजों को उपचार के लिए भर्ती किया। इनमें से दो मरीजों की मौत हो गई, क्योंकि वे समय पर अस्पताल में उपचार के लिए नहीं लाए गए थे।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सांप के डसने के बाद किसी तरह की देरी न करने और तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचने की अपील की है। सर्पदंश के मामलों में उपचार की सुविधा को मजबूत करने के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध करवाया जा रहा है।
चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार पीएचसी, सीएचसी, सिविल अस्पताल, जोनल अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को उपचार उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है।
जहर चूसने का प्रयास न करें
टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने लोगों को सलाह दी है कि सांप के डसने के बाद पीड़ित को शांत रखें और प्रभावित अंग की गतिविधि को कम से कम रखें। मरीज को जल्द से जल्द उचित स्वास्थ्य संस्थान पहुंचाएं। जख्म को काटने या उसका जहर चूसने का प्रयास न करें। झाड़-फूंक, घरेलू नुस्खों या बिना प्रशिक्षित व्यक्ति से उपचार करवाने में समय बर्बाद न करें। समय पर अस्पताल पहुंचना ही गंभीर जटिलताओं और जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।