प्रवीण प्रकाश कुमार
धर्मशाला। पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज की शोभा और धार्मिक आस्था का प्रतीक डल झील एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौटने को तैयार है। हर वर्ष राधाष्टमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र स्नान के लिए उपयोग में लाई जाने वाली इस ऐतिहासिक झील के पुनरुद्धार का कार्य जोर पकड़ चुका है।
जिला प्रशासन ने इस कार्य की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) धर्मशाला को सौंपी है और परियोजना के लिए 35 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। फिलहाल डल झील की लीकेज रोकने और गाद निकालने का कार्य जारी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही मशीनों ने खोदाई शुरू कर दी है।
खोदाई के दौरान झील में करीब आठ फुट नीचे पुराने डंगे और सड़क के अवशेष मिले हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि डल झील पहले कहीं अधिक गहरी थी, लेकिन वर्षों से जमा होती गाद ने इसका अस्तित्व लगभग निगल लिया। पूर्व में जैसे-जैसे गाद झील में आती गई वैसे-वैसे पानी का स्तर ऊपर उठता गया और इसके पानी को रोके रखने के लिए पूर्व में संबंधित विभाग झील के डंगे को ऊंचा करते गए।
वर्तमान में इस डल झील की ऊंचाई इतनी अधिक हो चुकी है कि पानी का अक्सर रिसाव होता रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर डल झील के पानी को 12 माह तक रोके रखना है तो गाद को पूरी तरह से बाहर निकालना होगा या फिर अन्य कोई उचित प्रबंध करने पड़ेंगे।