धर्मशाला। पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद लांछन लगाने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश प्रसारित करने और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने को कोर्ट ने मानसिक क्रूरता माना है। फैमिली कोर्ट पालमपुर ने 13 वर्ष पुराना वैवाहिक रिश्ता खत्म कर दिया है। अदालत ने पीड़िता की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए दोनों का विवाह विच्छेद करने का फैसला सुनाया।
यह निर्णय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट पालमपुर धीरू ठाकुर की अदालत ने दिया। अदालत के समक्ष दायर याचिका के अनुसार दोनों का विवाह 28 मार्च 2013 को हुआ था। पीड़िता का आरोप था कि शादी के बाद से ही पति उसके चरित्र पर लगातार संदेह करता रहा और रिश्तेदारों व परिचितों के बीच उसके बारे में गलत बातें फैलाता था।
मार्च 2023 में धार्मिक यात्रा के दौरान भी उसने व्हाट्सएप के माध्यम से अपमानजनक संदेश प्रसारित किए। पीड़िता के मुताबिक पति ने उसके अन्य लोगों के साथ रहने और शिमला चले जाने जैसी मनगढ़ंत अफवाहें फैलाकर उसे मानसिक संत्रास दिया, जिसे लेकर भवारना थाना में भी शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
अदालत ने पेश साक्ष्यों और संदेशों के आधार पर पति के आचरण को मानसिक क्रूरता माना। नोटिस भेजे जाने के बावजूद पति अदालत में हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(आईए) के तहत विवाह समाप्त करने का आदेश दिया गया।