धर्मशाला। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को 30 दिन के भीतर उपभोक्ता की फोन सेवा बहाल करनी होगी। साथ ही 15 हजार रुपये मुआवजा का भुगतान भी करना होगा।
बिना नोटिस टेलीफोन कनेक्शन काटने पर बीएसएनएल के सेवानिवृत्त उपमंडल अभियंता (एसडीई) भरत भूषण भरमेरा के पक्ष में जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
बीएसएनएल को 30 दिन के भीतर उनकी रियायती टेलीफोन सेवा किसी भी उपलब्ध तकनीक के माध्यम से बहाल करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा कि बिना पूर्व सूचना टेलीफोन कनेक्शन काटना सेवा में कमी है।
शिकायतकर्ता ने आयोग में दर्ज याचिका में कहा कि निगम ने मई 2024 में 837 रुपये के कथित बकाया के आधार पर बिना कोई नोटिस दिए लैंडलाइन कनेक्शन काटा दिया था। बाद में शिकायतकर्ता ने यह राशि जमा भी कर दी लेकिन इसके बावजूद बीएसएनएल ने सेवा बहाल नहीं की।
सुनवाई के दौरान बीएसएनएल ने तर्क दिया कि क्षेत्र में कॉपर केबल व्यवस्था पुरानी हो चुकी है और अब एफटीटीएच (फाइबर) तकनीक के जरिये ही कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। आयोग ने माना कि तकनीकी बदलाव का हवाला देकर सेवानिवृत्ति के समय दी गई रियायती सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता।
यदि तकनीक बदली गई थी तो उपभोक्ता को पहले इसकी जानकारी और उपलब्ध विकल्प दिए जाने चाहिए थे। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता वरिष्ठ नागरिक हैं और उनके लिए टेलीफोन आपात स्थिति में संपर्क का प्रमुख साधन है।
दो वर्ष से अधिक समय तक सेवा बहाल न होने से उन्हें मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलना पड़ा, जिसके लिए 15 हजार रुपये का मुआवजा उचित है। आयोग ने आदेश दिया कि 30 दिन के भीतर टेलीफोन सेवा बहाल नहीं की जाती है तो बीएसएनएल को सुविधा उपलब्ध कराने तक शिकायतकर्ता को हर माह एक हजार रुपये का भुगतान करना होगा।