जनजातीय गौरव दिवस पर सीयू में पुष्पांजलि अर्पण करते शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी। -संवाद
धर्मशाला। आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ केवल तीर-कमान से ही नहीं, बल्कि बौद्धिक युद्ध का भी नेतृत्व किया। बिरसा मुंडा ने कम उम्र में ही दुष्कर भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद धर्म के संरक्षण के लिए बहुमूल्य योगदान दिया। इसलिए उन्हें भगवान का दर्जा दिया गया है।
यह बात सभ्यता अध्ययन केंद्र दिल्ली के निदेशक रवि शंकर ने ‘जनजातीय गौरव दिवस’ पर हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता कही। नेशनल काउंसिल फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब के सलाहकार रहे रवि शंकर ने कहा कि सुनियोजित अभियान के तहत भारत के जनजातीय समाज को लेकर तीन बड़ी मिथ्या धारणाएं गढ़ी गई हैं।
पहली यह कि सभ्यतागत दृष्टि से भारत का जनजातीय समाज अलग-अलग रहा है। दूसरा यह समाज आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा रहा है। तीसरा, सामाजिक दृष्टि से यह एक पृथक समुदाय है। उन्होंने कहा कि भारत के अकादमिक जगत को जनजातीय समाज को लेकर बनाई गई इन मिथ्या धारणाओं को तोड़ने के लिए तथ्यपूर्ण शोध को बढ़ावा देना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा पर सही शोध करके ये मिथ्या धारणाएं स्वयं ही टूट जाएंगी।
इस व्याख्यान सीयू के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के संरक्षण और अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार के अकादमिक मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जनजातीय अध्ययन केंद्र के मानद निदेशक प्रो. मलकीत सिंह, सह आचार्य डॉ. उदय भान सिंह, सहायक आचार्य डॉ. जयप्रकाश सिंह, सहायक आचार्य करतार सिंह, रिसोर्स पर्सन डॉ. रविंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।