जसवां-प्रागपुर से विधायक एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर
जसवां-प्रागपुर से विधायक एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई और तत्काल निलंबन की मांग की है। ठाकुर ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक सेवाविस्तार पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने का प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का कर्तव्य जनता की सेवा करना होता है, न कि निजी रुतबे और राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति करना। लेकिन मुख्य सचिव का व्यवहार पद की गरिमा के बिल्कुल विपरीत है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि हाल ही में आयोजित एक निजी आयोजन में मुख्य सचिव और उनकी पत्नी का नाम निमंत्रण कार्ड पर छपा था। यह कार्यक्रम कथित तौर पर अधिकारियों के साथ बताया गया, लेकिन सच्चाई यह है कि उस आयोजन में कई कारोबारी और गैर सरकारी लोग भी मौजूद थे, जो वायरल तस्वीरों और वीडियो में साफ दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि जब इस कार्यक्रम की आलोचना शुरू हुई तो मुख्य सचिव ने इससे किनारा करते हुए इसे केवल अधिकारियों की बैठक बताया। यह बयान न केवल असत्य है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग और जनता के विश्वास के साथ धोखा है। ठाकुर ने कहा कि अगर इस पूरे मामले में सरकार मूकदर्शक बनी रहती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि ऐसे अधिकारियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने चेताया कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और इस तरह के गैर जवाबदेह रवैये को बेनकाब करेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से मुख्य सचिव को उनके पद से निलंबित करे और निष्पक्ष जांच शुरू करे, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे।