नूरपुर विकास खंड में दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में जहां पिछले कई सालों से प्रधान पद पर कब्जा जमाए बैठे धुरंधरों को करारी हार का मुंह देखना पड़ा तो कइयों का आरक्षण के उल्टफेर के चलते अपनी पत्नियों (निवर्तमान प्रधान) की जगह चुनावी दंगल में उतारने का दांव भी उल्टा पड़ गया।
दूसरे चरण के चुनाव में कई पंचायतों में नए चेहरों ने न सिर्फ ग्रामीण संसद के पुराने दिग्गजों को पटकनी दी, बल्कि किसी भी निवर्तमान प्रधान को दोबारा जीतने तक का मौका नहीं दिया। नूरपुर विकास खंड की कुल 43 में से 21 ग्राम पंचायतों में मंगलवार को संपन्न हुए दूसरे चरण के चुनाव में नए चेहरों ने क्लीन स्वीप किया। दूसरे चरण के चुनाव नतीजों पर नजर दौड़ाएं तो 21 ग्राम पंचायतों में से 12 महिलाओं ने प्रधान पद पर कब्जा जमाया।
जबकि पुरुषों के हिस्से सिर्फ 9 पंचायतों की सरपंची आई। इस चुनाव में वासा वजीरां पंचायत की निवर्तमान कमलेश कौर और खन्नी उपरली पंचायत से लगातार तीन बार प्रधान रह चुके होशियार सिंह को हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चरूड़ी पंचायत में निवर्तमान प्रधान सरिता देवी की जगह इस बार चुनावी दंगल में कूदे उनके पति एवं पूर्व प्रधान शाम सिंह के अलावा ममूह गुरचाल से निवर्तमान महिला प्रधान अंजू बाला के पति रविंद्र चौधरी को भी मुंह की खानी पड़ी।
इसी तरह भड़वार पंचायत में पिछले कई सालों से प्रधान पद पर काबिज रहने वाले पूर्व प्रधान झंडा सिंह को नए चेहरे के रूप में परमजीत सिंह के मुकाबले शिकस्त का सामना करना पड़ा। हालांकि, पिछली बार प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित होने के चलते वह अपनी पत्नी को जितवाने में कामयाब रहे थे।
वहीं, इस बार महिला आरक्षित आघार पंचायत में भी निवर्तमान प्रधान कमल सिंह की पत्नी को गुलजारा बीबी ने हराकर प्रधान पद पर कब्जा किया। सदवां पंचायत में भी एक बार प्रधान पद पर रह चुकी निवर्तमान जिला परिषद सदस्य अशोक शर्मा की पत्नी अरुणा शर्मा हार गई हैं।
जबकि इसी पंचायत में उपप्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे निवर्तमान प्रधान एवं ठेहड़ जिला परिषद वार्ड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी प्रताप शुक्ला को नए चेहरे राजेश शर्मा ने शिकस्त दी। पंदरेहड़ पंचायत के उपप्रधान सिकंदर राणा ने निवर्तमान प्रधान कमलेश कुमारी के पति और पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह को हराकर प्रधान पद कब्जाया।