पालमपुर में 16 कृषि सखियों को दिया प्रशिक्षण
कम लागत में खेती और जैविक खाद तैयार करने के सिखाए तरीके
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। महिलाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़कर उनकी आर्थिकी मजबूत करने के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत करवाए गए इस प्रशिक्षण में कांगड़ा और मंडी जिलों के पांच विकास खंडों की 16 कृषि सखियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी करवाया। इसमें फसल पोषण, पादप रोगों और हानिकारक कीटों का प्रबंधन, कम लागत वाले पौध अर्क तैयार करना, जीवाणु खादों और जैव-एजेंट का उपयोग शामिल रहा। प्रतिभागियों को जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत तैयार करने की विधियां भी सिखाई गईं।
विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. जनार्दन सिंह ने प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है। इससे मानव स्वास्थ्य की रक्षा में भी योगदान मिलेगा। उन्होंने कृषि सखियों से प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान को अपनी-अपनी पंचायतों के किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
समापन समारोह में डॉ. जनार्दन सिंह ने प्रशिक्षणार्थी कृषि सखियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रामेश्वर ने प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों की जानकारी दी। इस अवसर पर जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग के प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गोपाल कतना और डॉ. राकेश चौहान भी मौजूद रहे।