पालमपुर(कांगड़ा)। प्रदेश से लेकर केंद्र सरकारें भले ही मरीजों को जेनेरिक दवाइयाें की सुविधा देने की बात करती हैं, लेकिन धरालत पर सरकारों की यह योजना साकार होती नहीं दिखती है। सीएसआईआर संस्थान पालमपुर में हुई इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईएमए)
की 12वीं कॉन्फ्रेस में इसकी झलक साफ नजर आई। संस्थान में बाहर से लेकर अंदर तक ब्रांडेड दवाइयों के पोस्टर सरेआम लगे रहे। इसमें कई कंपनियों ने अपने पोस्टर चिपकाए हुए थे, जबकि इन पोस्टरों पर लगी कई दवाइयां के ऐसे नाम भी लिखे हुए थे, जिनको चिकित्सक लिख ही नहीं सकते हैं। संस्थान की दीवारों पर चिपके ये पोस्टर यह साबित कर रहे थे कि स्वास्थ्य मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री भी मरीजों को जेनेरिक दवाइयां लिखने की बात करते रहेे हों। प्रदेश में सत्ता में आते ही सरकार और स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने चिकित्सकों को साफ आदेश दिए थे कि प्रदेश के चिकित्सक मरीजों को जेनंरिक दवाइयां ही लिखें। इससे गरीबों को इसका लाभ मिल सके। चिकित्सकों पर ब्रांडेड दवाई लिखने पर कार्रवाई की भी बात हुई थी, लेकिन चिकित्सक ब्रांडेंड दवाइयों का पीछा छोड़ने वाले नहीं है। हालांकि, इस कॉन्फ्रेंस में सरकारी से लेकर निजी चिकित्सक मौजूद रहे।