चेली बस हादसे की सीबीआई करे जांच
मृतक बच्चों के परिजनों ने उठाई मांग
विधायक के माध्यम से पीएम को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर स्कूल बस हादसे में अकाल मौत का ग्रास बने मासूम बच्चों के परिजनों ने हादसे की सीबीआई से जांच करने की मांग उठाई है। ठेहड़ पंचायत उपप्रधान हरदीप सिंह की अगुवाई में मलकवाल में नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया और एसडीएम नूरपुर आबिद हुसैन सादिक के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा उच्च न्यायालय को स्कूल प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और एनडीआरएफ के खिलाफ शिकायत पत्र सौंपा। अभिभावकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दुर्घटनाग्रस्त स्कूल बस काफी पुरानी थी और अक्सर कई बार खराब हो जाती थी। यही नहीं, एक बार बस को स्टार्ट करते समय आग भी लग गई थी। साथ ही स्कूल प्रशासन ने न तो बस में कोई परिचालक रखा था और न ही कोई हेल्पर। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन हादसे में मृत बच्चों की जिम्मेदारी लेने से कतरा रहा है। पीड़ितों ने कहा कि जब भी स्कूल में कोई बैठक होती थी तो अध्यापक वर्ग बच्चों की प्रशंसा करते थे, लेकिन हादसे के बाद स्कूल का कोई भी अध्यापक उनका दुख बांटने नहीं आया। पीड़ितों ने इस हादसे की सीबीआई जांच करवाने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक सीबीआई जांच की कोई भी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक स्कूल बंद करवाया जाए। नौ अप्रैल को जिस जगह बस गिरी थी, वहां कुछ समय पहले एक डंगा लगाया गया था जो कुछ माह बाद गिर गया। उस डंगे के गिरने के कारणों की भी जांच की जाए। 7-8 माह पहले उसी जगह एक ट्रक गिरा था जिसको संबंधित विभाग ने नहीं उठाया। उसी ट्रक के ऊपर बस गिरने से ट्रक के लोहे से टकराने से कई बच्चों की मौके पर मृत्यु हो गई थी। इस डंगे के साथ-साथ ट्रक हादसे की भी सीबीआई जांच की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जो पीड़ित गरीब परिवारों से संबंधित है, उन्हें सरकारी नौकरी या पेंशन का प्रावधान किया जाए।
स्कूल प्रशासन पर प्राथमिकी दर्ज की जाए
ज्ञापन सौंपने के बाद पीड़ित परिवार पंचायत उपप्रधान की अगुवाई में नूरपूर थाने में पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी से मिलकर स्कूल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा स्कूल बंद करने की मांग की। नूरपुर थाने में पहुंचे परिजन विक्रम कटोच, अजय सिंह और राम प्यारा ने कहा कि 23 दिन बीत जाने तक जो भी कार्रवाई हुई है, उससे वे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन ने किसको पूछकर स्कूल खोला? क्या स्कूल खोलने से पहले पीड़ित परिवारों से बैठक करना जरूरी नहीं था? उन्होंने कहा कि उन लोगों ने अपने बच्चे खोए हैं, इसकी जवाबदेही किसकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्कूल बंद न करवाया गया तो पीड़ित परिवार कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। एसडीएम नुरपूर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि पीड़ित परिवारों तथा गांव वासियों के ज्ञापन को उन्होंने जिलाधीश तथा पुलिस अधीक्षक तको प्रेषित कर दिया है। क्षेत्र में शांति भंग न हो इसके लिए स्कूल प्रशासन को स्कूल न खोलने के लिए कहा गया है।