परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) गरली-परागपुर के निवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को नक्शे पास करवाने या अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए 60 किलोमीटर दूर धर्मशाला जाना पड़ता है।
हालांकि विभाग दावा करता है कि सभी आवेदन ऑनलाइन किए जा सकते हैं परंतु जमीनी स्तर पर बिजली और पानी के कनेक्शन के लिए पंचायतों की ओर से दी जाने वाली एनओसी जैसे कई कार्यों के लिए आज भी कर्मचारियों के पास व्यक्तिगत जाना अनिवार्य होता है।
वर्ष 2002 में इस क्षेत्र को टीसीपी के दायरे में शामिल किया गया था। दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यहां का विकास प्रबंधन प्लान तैयार नहीं कर पाया है। स्थानीय निवासी रमन, मनोज, विशाल, राजेश, अजय, साहिल, संजीव, जितेंद्र, सुरेश, सुरिंदर और सतीश का कहना है कि इसके बाद घोषित हुए कई अन्य क्षेत्रों की योजनाएं तैयार हो चुकी हैं पर उन पर गौर नहीं किया जा रहा।
विभाग का तर्क है कि वह इस योजना को खुद तैयार कर रहा है जबकि अन्य क्षेत्रों का काम बाहरी एजेंसियों से कराया गया था। क्षेत्र के लोगों ने मांग उठाई है कि जब तक परागपुर में साडा का स्थायी कार्यालय नहीं खुलता तब तक विभाग का एक कर्मचारी सप्ताह में कम से कम एक बार स्थानीय खंड विकास अधिकारी कार्यालय में बैठे।
टीसीपी के सभी कार्य ऑनलाइन होते हैं। कोई भी विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है। बाकी साडा क्षेत्र गरली-परागपुर का डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है। यह किसी कारण से लंबित था।
-हेमिश नेगी, निदेशक, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, कसुम्पटी, शिमला-9