धर्मशाला। जिला कांगड़ा के पशुपालन विभाग में ग्रामीण स्तर पर फील्ड स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। जिले में पशुपालन विभाग में पंचायत अटेंडेंट और पंचायत सहायकों के कुल 887 पद हैं, जिनमें से 494 पद खाली हैं। इस कारण एक-एक वेटरनरी फार्मासिस्ट को दो से तीन अतिरिक्त पंचायतों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है, जिससे विभागीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक विभाग में पंचायत अटेंडेंट के 529 में से 310 और पंचायत सहायकों के 358 में से 184 पद रिक्त चल रहे हैं। जमीनी स्तर पर इन दोनों श्रेणियों के 494 पद खाली होने का सीधा असर रूटीन कामकाज और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। मौजूदा समय में पशुओं में लंपी वायरस और गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
फील्ड स्टाफ की भारी कमी के चलते घर-घर जाकर टैगिंग और वैक्सीन लगाने का काम काफी धीमा हो गया है, जिससे पशुपालकों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही है। पशुपालन विभाग कांगड़ा की उपनिदेशक डॉ. सीमा गुलेरिया ने बताया कि विभाग में 494 पद खाली होने से फार्मासिस्टों पर अतिरिक्त बोझ है और टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। रिक्त पदों की रिपोर्ट हर माह उच्च निदेशालय को भेजी जा रही है।