धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में पिछले एक वर्ष में लगभग 400 नई सहकारी सभाएं पंजीकृत हुई हैं। इनमें 55 प्राथमिक कृषि सहकारी सभाएं, 343 दुग्ध उत्पादक सहकारी सभाएं और दो मत्स्य सहकारी सभाएं शामिल हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इन सहकारी समितियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश सरकार भारत सरकार के साथ मिलकर कई योजनाएं चला रही है।
इनमें सहकारी सभाओं के कंप्यूटरीकरण और हिमाचल प्रदेश सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक तथा कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का कंप्यूटरीकरण शामिल है। सहकारिता विभाग के उप पंजीयक और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट के नोडल अधिकारी ई. प्रत्युष चौहान ने बताया कि प्रदेश में अब तक 1789 प्राथमिक सभाओं को कंप्यूटरीकरण के लिए चिह्नित किया गया है।
पहले चरण में 870 में से 660 सभाओं में सॉफ्टवेयर लाइव हो चुका है, जबकि दूसरे चरण की 919 सभाओं में कंप्यूटर, प्रिंटर आदि की डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कंप्यूटरीकरण से सभाओं में धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और सदस्यों को अपने खातों की सटीक जानकारी प्राप्त होगी। इसके साथ ही सहकारिता विभाग को अंकेक्षण में भी सुविधा मिलेगी।
विभाग अपनी वेबसाइट को भी अपडेट कर रहा है, जिससे विभाग के सभी कार्य ऑनलाइन किए जा सकेंगे, जैसे सहकारी सभाओं का पंजीकरण, कोर्ट केस, अपील और सुनवाई। उन्होंने प्रदेश की सहकारी सभाओं के प्रधानों, सचिवों और सदस्यों से इन योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।