धर्मशाला। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित प्रधानमंत्री आदर्श गांव योजना के तहत जिला कांगड़ा में 64 गांवों को चयनित किया है। इसमें से 40 गांवों को आदर्श घोषित कर दिया है। बुधवार को प्रधानमंत्री आदर्श गांव योजना अभिसरण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जनसंख्या वाले गांवों का एकीकृत विकास सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि आदर्श ग्राम एक ऐसी संकल्पना है जिसमें लोगों को विभिन्न बुनियादी सेवाएं देने की परिकल्पना की गई है, ताकि समाज के सभी वर्गों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हो और असमानताएं कम से कम रहें। इन सब गांवों में वह सब ऐसी अवसंरचना होगी और इसके निवासियों को ऐसी सभी बुनियादी सेवाओं की सुविधा मिलेगी, जो एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य 10 विभिन्न कार्यक्षेत्रों जैसे पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण सड़कें और आवास, विद्युत और स्वच्छ ईंधन, कृषि पद्धतियां, वित्तीय समावेषण डिजीटलीकरण और जीवन यापन तथा कौशल विकास के तहत 50 निगरानी योग्य संकेतकों में सुधार करना है। प्रत्येक निगरानी योग्य संकेतक के दो अंक रखे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी गांव अधिकतम 100 अंक प्राप्त कर सकता है।
केंद्र सरकार द्वारा ऐसे सभी चयनित गांवों के लिए 20 लाख की राशि अंतर पाटन घटक के तहत कार्यकलापों के लिए निर्धारित की है। जिला कल्याण अधिकारी दीपाली तोमर ने बताया कि जिन्हें 50 निगरानी योग्य संकेतकों में 70 या इससे अधिक अंक प्राप्त हैं, को उपायुक्त कांगड़ा, जो जिला प्रधानमंत्री आदर्श गांव योजना अभिसरण समिति के अध्यक्ष भी हैं, द्वारा आदर्श ग्राम घोषित किया है।