फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फाइलों में सिमटा नूरपुर बाईपास का निर्माण

विज्ञापन
विज्ञापन
रितेश महाजन
विज्ञापन

नूरपुर (कांगड़ा)। बेशक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 154 पर पड़ने वाले शहरों नूरपुर, बैजनाथ, पपरोला और ज्वालामुखी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए नए बाईपास बनाने की प्रस्तावित योजना भले ही करीब ढाई साल बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाई हो, लेकिन अब इस नेशनल हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए लाइनमेंट का कार्य शुरू होने के बाद नए बाईपास बनाने का जिन्न दोबारा सरकारी फाइलों से बाहर निकल आया है। दरअसल, पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट की लाइनमेंट का कार्य शुरू होने के बाद इसके रूट में आने वाले प्रमुख बाजारों के अस्तित्व को बचाने के लिए बाईपास की दरकार महसूस होने लगी है। सूत्रों की मानें तो पठानकोट-मंडी फोरलेन मुख्य रूप से जसूर, नूरपुर, कोटला, शाहपुर, गगल, नगरोटा, पालमपुर, बैजनाथ, जोगिंद्रनगर, घटासणी से होकर गुजरेगा। इसकी लाइनमेंट का कार्य पूरा होने के बाद फोरलेन प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में फोरलेन की जद में आने वाले बाजारों के आसपास बाईपास बनाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। देखा जाए तो पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे पर मेन मार्किटों में वाहन खड़ा करने के लिए कोई जगह चिन्हित न होने के कारण न सिर्फ कारोबार प्रभावित होता है, बल्कि बेतरतीब ट्रैफिक के चलते आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को भी काफी सुविधा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, पूर्व में इन कस्बों में नए बाईपास के निर्माण की प्रस्तावित योजना से भारी वाहनों का प्रवेश बंद होने से बेतरतीब ट्रैफिक समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन विभागीय सुस्ती के चलते करीब डेढ़ साल तक नए बाईपास की योजना फाइलों से आगे नहीं सरक पाई। उधर, नेशनल हाईवे विंग के अधिशासी अभियतां अनिल संगराय ने बताया कि उस समय नए बाईपास की फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए किसी भी कंसलटेंट एजेंसी ने टेंडर कोड नहीं किए और इसी दौरान पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद बाईपास निकालने की कागजी प्रक्रिया रोक दी गई थी। लिहाजा अब उक्त प्रोजेक्ट एनएचएआई के पास होने के चलते लाइनमेंट की प्रक्रिया में बाईपास की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
विज्ञापन

इनसेट
कंसल्टेंसी एजेंसी हायर नहीं कर पाया एनएच बिंग
केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने वर्ष 2015 के एनुअल प्लान में उक्त शहरों में बाईपास की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए बाकायदा करीब डेढ़ करोड़ रुपये की राशि भी जारी की थी। यह बात अलग है कि प्रदेश के लोनिवि का एनएच विंग करीब डेढ़ साल बाद भी फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी ही हायर नहीं कर पाया। इससे इन चारों कस्बों में प्रस्तावित नए बाईपास का रूट क्या होगा, इसका पता बाईपास की फिजिबिलिटी रिपोर्ट आने के बाद ही लग सकता था। खैर, पिछले साल पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन डिक्लेयर होने के बाद तो नए बाईपास की फाइल ही बंद कर दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें