नूरपुर (कांगड़ा)। इस बार टिकट आवंटन में अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए भाजपा ने तमाम अटकलों के विपरीत नूरपुर में पूर्व विधायक राकेश पठानिया को टिकट थमाया है। बुधवार शाम भाजपा प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही पठानिया समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। टिकट की घोषणा के साथ ही राकेश पठानिया का दस साल का सियासी वनवास भी खत्म हो गया। इससे पहले नूरपुर में इस बार भी पार्टी टिकट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था।
विदित रहे कि 2007 के चुनाव में टीम शांता ने मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी कहे जाने वाले राकेश पठानिया से कमल का फूल छीनकर महिला नेत्री मालविका पठानिया को थमाया था, जो मात्र 4003 वोट लेकर चौथे स्थान पर रही थीं और अपनी जमानत तक भी नहीं बचा पाई थीं। इसके विपरीत भाजपा से पत्ता कटने के बाद बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे राकेश पठानिया ने तत्कालीन राजस्व मंत्री स्व. सत महाजन के बेटे अजय महाजन को 4165 मतों से अंतर से पटकनी देकर दूसरी बार जीत का परचम लहराया था। 2012 में भी भाजपा ने नूरपुर से रणवीर निक्का पर दांव खेला था, लेकिन लगातार दूसरी बार पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। राजपूत बाहुल्य नूरपुर हलके के राजनीतिक इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो यहां हमेशा से पार्टी के बजाय व्यक्ति विशेष का फैक्टर हावी रहा है। बेशक नूरपुर विस क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है जबकि भाजपा के उम्मीदवारों की इक्का-दुक्का मौकों को छोड़कर जमानत जब्त होती रही है। लेकिन 1996 के उपचुनाव में पहली बार भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे युवा तुर्क राकेश पठानिया ने कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी और 1998 में पहली बार कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाया। इससे पहले 1993 के विस चुनाव में कांग्रेस के फील्ड मार्शल कहे जाने वाले सत महाजन ने भाजपा प्रत्याशी मेघराज अवस्थी को 15091 मतों के अंतर से हराया था।