धर्मशाला। इलेक्ट्रिक स्कूटी की पूरी राशि लेने के बाद भी उपभोक्ता को डिलीवरी न करने पर कंपनी को 9 फीसदी ब्याज के साथ 1,47,016 रुपये वापस लौटाने होंगे। साथ ही कंपनी को 10 हजार रुपये मुआवजा और 7500 रुपये मुकद्दमा खर्च भी उपभोक्ता को देने के आदेश दिए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग के समक्ष अनु बाला निवासी मंगडियाल डाकघर छोट्टर, कांगड़ा ने इस बारे में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा था कि अप्रैल 2025 में इंदौरा स्थित ओला कंपनी के प्रतिनिधि ने उन्हें कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने के लिए राजी किया था। उन्होंने 23 मई 2025 को यूपीआई के माध्यम से 17,831 रुपये का अग्रिम भुगतान किया। बाद में उन्होंने एलआईसी पॉलिसी पर ऋण लिया और शेष राशि हस्तांतरित कर दी।
उन्होंने विपक्षी के खाते में नेफ्ट के माध्यम से 1,22,400 रुपये का भुगतान किया और कुल 1,40,231 की राशि प्राप्त होने के बावजूद विपक्षी पक्ष ने वादे के अनुसार 20 दिनों के भीतर वाहन नहीं दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 30 जून 2025 को उन्हें एक फर्जी डिलीवरी संदेश मिला। इसमें दावा किया था कि वाहन वितरित कर दिया है जबकि वास्तव में वाहन की डिलीवरी नहीं हुई थी। इसके अलावा 27 जून 2025 को एक बीमा पॉलिसी जारी की गई जिसमें कागजों पर वाहन को सक्रिय दिखाया गया लेकिन वास्तव में वह गायब था।
उन्होंने कहा कि कई बार याद दिलाने और मौखिक अनुरोधों के बावजूद विपक्षी पक्ष ने न तो स्कूटी वितरित की और न ही राशि वापस की जिससे शिकायतकर्ता को दूसरा वाहन खरीदना पड़ा। विपक्षी पक्ष की ओर से सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने यह शिकायत दर्ज की है। आयोग ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों को जांचने के बाद स्कूटी कंपनी को शिकायतकर्ता को 1,47,016 रुपये (जिसमें वाहन की लागत और बीमा प्रीमियम शामिल है) 9 फीसदी ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिए।