अमर उजाला ब्यूरो
लंज (कांगड़ा)। चंगर क्षेत्र की पंचायतों और लंज के किसान बिना सिंचाई सुविधा और बारिश के सूखे खेतों में ही गेहूं की बिजाई करने को मजबूर हैं। किसान एक तरफ तो गेहूं की बिजाई कर रहे हैं पर दूसरी तरफ यह भी सोचने को मजबूर है कि कहीं बिजाई करके गलती तो नहीं कर रहे हैं। किसानों को डर सता रहा है कि कहीं बीजा गया गेहूं का बीज ही खराब न जाए। किसान अपने लिए कम, लेकिन पशुओं के चारे के लिए ज्यादा चिंतित नजर आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ पिछले दस साल पहले बनी सिंचाई योजनाओं का लाभ अभी तक किसानों को नहीं मिल पाया है। जब भी किसान पानी की डिमांड करते हैं तो आईपीएच विभाग आनन-फानन में इन योजनाओं का काम शुरू कर देता है और ठेकेदारों का फायदा देने के लिए ऐसा किया जाता।
धरातल पर किसानों के खेतों को पानी नहीं मिल पाता है। किसान सभा के प्रधान रघुवीर सिंह पांजला ने बताया कि किसान सभा ने पंद्रह दिन पहले आईपीएच विभाग को किसानों के खेतों को सिंचाई करने के बारे में लिखित मांग पत्र सौंपा था, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर एक हफ्ते में किसानों की जमीनों को पानी सप्लाई नहीं किया गया तो इलाके के किसान मजबूरन आईपीएच उपमंडल मनेई की तालाबंदी करने और धरना प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए पिछले दस साल पहले बनाई सिंचाई योजनाएं काम नहीं कर रही हैं तो यह विभागीय लापरवाही की वजह से है। इसमें किसानों का कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता शाहपुर को भी लिखित पत्राचार किया गया है, जिसका अभी कोई जवाब नहीं आया है। उधर, आईपीएच मनेई के सहायक अभियंता सुरेश धीमान ने कहा कि तकनीकी खराबी की वजह से किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा सका है चार दिन में दोनों सिंचाई योजनाओं को सुचारु रूप से चला दिया जाएगा।