धर्मशाला (कांगड़ा)। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रविंद्र सिंह रवि और कांग्रेस के सुधीर शर्मा को अपना विधानसभा क्षेत्र छोड़कर दूसरे क्षेत्रों से चुनाव लड़ना लक्की साबित हुआ था। घर छोड़ना दोनों के लिए फायदेमंद रहा। पुनर्सीमांकन के चलते सत्ता का दरवाजा खोलने वाले कांगड़ा जिले में 16 में से एक विधानसभा सीट कम हुई थी। पुनर्सीमांकन के चलते थुरल सीट को मर्ज कर जयसिंहपुर सीट का नाम देकर आरक्षित कर दिया था। बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र की सीट भी आरक्षित हो गई थी। दोनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुधीर शर्मा और रविंद्र सिंह रवि को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र छोड़कर धर्मशाला और देहरा से चुनाव लड़ना पड़ा था।
पुनर्सीमांकन के बाद पहली बार हुए विधानसभा चुनाव की मार भाजपा पर पड़ी थी। भाजपा पूरे जिला कांगड़ा में 15 में से सिर्फ तीन विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज कर पाई थी। रविंद्र सिंह रवि ने देहरा से आजाद उम्मीदवार योगराज को सबसे ज्यादा 15293 वोटों से पराजित किया था। सुधीर शर्मा ने धर्मशाला के चुनावी रण में भाजपा के किशन कपूर को 6652 वोटों से हराया था।
कांगड़ा और इंदौरा विधानसभा क्षेत्रों में आजाद उम्मीदवार पवन काजल और मनोहर धीमान ने कांग्रेस और भाजपा के समीकरण बिगाड़े थे। दोनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे। पवन काजल ने महज 563 जबकि मनोहर धीमान 7339 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की थी। दोनों सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे थे।
गोमा बने थे सबसे कम उम्र के विधायक
जयसिंहपुर के विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनावी रण में उतरे यादविंद्र गोमा पिछले चुनावों में सबसे कम उम्र के विधायक बने थे। गोमा ने भाजपा के आत्मा राम को 9735 वोटों से पराजित किया था।