फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himachal : जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को दी विदाई, अब झारखंड के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त; गार्ड ऑफ आर्नर भी दिया

Fri, 18 Jul 2025 09:02 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान के सम्मान में शुक्रवार को विदाई समारोह हुआ। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को दी विदाई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान के सम्मान में विदाई समारोह हुआ। न्यायमूर्ति चौहान को 23 फरवरी 2014 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 30 नवंबर 2014 को न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

विज्ञापन


उन्होंने जनहित याचिकाओं के माध्यम से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, गाड़ियों में रंग-बिरंगी लाइटें, राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण और ओवर स्पीड पर कई कड़े निर्णय दिए। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि न्यायमूर्ति चौहान ने अपने कार्यकाल में 75,000 मामलों का निपटारा किया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल, न्यायाधीश संदीप शर्मा, न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ, न्यायाधीश सुशील कुकरेजा, न्यायाधीश सत्येन वैद्य, न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह, न्यायाधीश रंजन शर्मा और न्यायाधीश राकेश कैथला मौजूद रहे।

विज्ञापन


विदाई समारोह के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के सदस्य, रजिस्ट्रार जनरल, अन्य रजिस्ट्रार, अधिकारी और उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के कर्मचारी उपस्थित थे। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। फुल कोर्ट रिफरेंस को महाधिवक्ता अनूप रतन, सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा और बार कौंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष लवनीश कंवर ने भी संबोधित किया।
विज्ञापन


ईमानदारी और लगन से काम करें युवा अधिवक्ता : चौहान
न्यायाधीश चौहान ने कहा कि वह जिला शिमला के टिक्कर गांव से संबंध रखते हैं। आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनके माता-पिता, भाई-बहन, सास-ससुर और पत्नी का बहुत बड़ा योगदान है। 1970 के दशक में जब लोग शिक्षा के बारे में सोचते भी नहीं थे, तो उनके पिता ने बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं किया और सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा दी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें