हिमाचल हाईकोर्ट ने जेबीटी भर्ती प्रक्रिया पर नई बंदिश लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि जब तक वह जेबीटी कोर्स सत्र 2002-2004 और 2003-2005 के प्रशिक्षुओं की नियुक्ति नहीं कर देती, तब तक किसी और को बतौर जेबीटी अध्यापक नियुक्ति न दी जाए।
उक्त आदेश न्यायाधीश संजय करोल ने लगभग 100 प्रार्थियों द्वारा दायर अनुपालना याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किये।
प्रार्थियों के अनुसार उन्होंने सत्र 2002-2004 और 2003-2005 में जेबीटी कोर्स पूरा किया था, परंतु राज्य सरकार उन्हें नियुक्ति प्रदान करने में विफल रही है।
जबकि सरकार ने ऐसे जेबीटी प्रशिक्षुओं को नियुक्ति दे दी है, जिन्होंने इन प्रार्थियों के बाद जेबीटी कोर्स पूरा किया।
अब प्रार्थियों को जेबीटी के पद पर नियुक्ति प्रदान करने के लिए टेट परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रावधान बनाया गया है।
अदालत ने 21 अगस्त 2012 के आदेशों में प्रार्थियों को बिना टेट जेबीटी के पद पर नियुक्ति देने के लिए राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया था। राज्य सरकार द्वारा अदालत के आदेशों की पालना न करने पर प्रार्थियों ने अनुपालना याचिका दायर की है।
गौरतलब है कि कुल्लू के एक निजी जेबीटी संस्थान ने बिना अनुमति के दो बैच जेबीटी के बिठा दिए थे। इस संस्थान को हाईकोर्ट ने कास्ट भी लगाई थी।
विवाद लंबे समय तक कोर्ट में होने के कारण इस बैच के प्रशिक्षुओं को भी नौकरी नहीं मिल पाई।